महाभारत 7.104.17
प्रहस्य भीमसेनस्तु कर्णं प्रत्यर्पयद्रणेसायकानां चतुःषष्ट्या क्षिप्रकारी महाबलः
prahasya bhīmasenastu karṇaṃ pratyarpayadraṇesāyakānāṃ catuḥṣaṣṭyā kṣiprakārī mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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