महाभारत 7.105.22
ततो दुर्योधनः प्रायात्तूर्णमाचार्यशासनात्उद्यम्यात्मानमुग्राय कर्मणे सपदानुगः
tato duryodhanaḥ prāyāttūrṇamācāryaśāsanātudyamyātmānamugrāya karmaṇe sapadānugaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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