महाभारत 7.105.5
यदि तावद्रणे पार्थो व्यतिक्रान्तो महारथःकथं सात्यकिभीमाभ्यां व्यतिक्रान्तोऽसि मानद
yadi tāvadraṇe pārtho vyatikrānto mahārathaḥkathaṃ sātyakibhīmābhyāṃ vyatikrānto'si mānada
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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