महाभारत 7.106.28
तं भीमसेनः संप्राप्तं वत्सदन्तैः स्तनान्तरेविव्याध बलवान्क्रुद्धस्तोत्त्रैरिव महाद्विपम्
taṃ bhīmasenaḥ saṃprāptaṃ vatsadantaiḥ stanāntarevivyādha balavānkruddhastottrairiva mahādvipam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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