महाभारत 7.106.48
तत्तु भीमो महाराज कर्णस्य चरितं रणेनामृष्यत महेष्वासः क्रोधादुद्वृत्य चक्षुषी
tattu bhīmo mahārāja karṇasya caritaṃ raṇenāmṛṣyata maheṣvāsaḥ krodhādudvṛtya cakṣuṣī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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