महाभारत 7.108.17
राजन्वैकर्तनो भीमं क्रुद्धः क्रुद्धमरिंदमम्पराक्रान्तं पराक्रम्य विव्याध त्रिंशता शरैः
rājanvaikartano bhīmaṃ kruddhaḥ kruddhamariṃdamamparākrāntaṃ parākramya vivyādha triṃśatā śaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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