महाभारत 7.108.9
अजय्याः पाण्डवास्तात देवैरपि सवासवैःन च तद्बुध्यते मन्दः पुत्रो दुर्योधनो मम
ajayyāḥ pāṇḍavāstāta devairapi savāsavaiḥna ca tadbudhyate mandaḥ putro duryodhano mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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