महाभारत 7.109.10
सर्वशैक्यां चतुष्किष्कुं गुर्वीं रुक्माङ्गदां गदाम्प्राहिणोत्सूतपुत्राय षडस्रामविचारयन्
sarvaśaikyāṃ catuṣkiṣkuṃ gurvīṃ rukmāṅgadāṃ gadāmprāhiṇotsūtaputrāya ṣaḍasrāmavicārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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