महाभारत 7.109.21
ततस्तमेवाधिरथिः स्यन्दनं दुर्मुखे हतेआस्थितः प्रबभौ राजन्दीप्यमान इवांशुमान्
tatastamevādhirathiḥ syandanaṃ durmukhe hateāsthitaḥ prababhau rājandīpyamāna ivāṃśumān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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