महाभारत 7.109.26
अपिबन्सूतपुत्रस्य शोणितं रक्तभोजनाःक्रुद्धा इव मनुष्येन्द्र भुजगाः कालचोदिताः
apibansūtaputrasya śoṇitaṃ raktabhojanāḥkruddhā iva manuṣyendra bhujagāḥ kālacoditāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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