महाभारत 7.11.14
नाकारो गूहितुं शक्यो बृहस्पतिसमैरपितस्मात्तव सुतो राजन्प्रहृष्टो वाक्यमब्रवीत्
nākāro gūhituṃ śakyo bṛhaspatisamairapitasmāttava suto rājanprahṛṣṭo vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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