महाभारत 7.11.28
फल्गुनस्य समक्षं तु न हि पार्थो युधिष्ठिरःग्रहीतुं समरे शक्यः सेन्द्रैरपि सुरासुरैः
phalgunasya samakṣaṃ tu na hi pārtho yudhiṣṭhiraḥgrahītuṃ samare śakyaḥ sendrairapi surāsuraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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