महाभारत 7.112.13
यथैव हि शरैः पार्थः सूतपुत्रेण छादितःतथैव कर्णं समरे छादयामास पाण्डवः
yathaiva hi śaraiḥ pārthaḥ sūtaputreṇa chāditaḥtathaiva karṇaṃ samare chādayāmāsa pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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