महाभारत 7.112.23
ततो वामेन कौन्तेयः पीडयित्वा शरासनम्मुष्टिना पाण्डवो राजन्दृढेन सुपरिष्कृतम्
tato vāmena kaunteyaḥ pīḍayitvā śarāsanammuṣṭinā pāṇḍavo rājandṛḍhena supariṣkṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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