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महाभारत 7.112.2
अपक्रम्य स भीमस्य मुहूर्तं शरगोचरात्तव चाधिरथिर्दृष्ट्वा स्यन्दनेभ्यश्च्युतान्सुतान्
apakramya sa bhīmasya muhūrtaṃ śaragocarāttava cādhirathirdṛṣṭvā syandanebhyaścyutānsutān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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