महाभारत 7.112.31तान्निहत्य महाबाहू राधेयस्यैव पश्यतःसिंहनादरवं घोरमसृजत्पाण्डुनन्दनःtānnihatya mahābāhū rādheyasyaiva paśyataḥsiṃhanādaravaṃ ghoramasṛjatpāṇḍunandanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें