महाभारत 7.113.10
ते वध्यमानाः समरे भीमचापच्युतैः शरैःप्राद्रवंस्तावका योधाः किमेतदिति चाब्रुवन्
te vadhyamānāḥ samare bhīmacāpacyutaiḥ śaraiḥprādravaṃstāvakā yodhāḥ kimetaditi cābruvan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें