महाभारत 7.113.15ततः प्रावर्तत नदी घोररूपा महाहवेबभूव च विशेषेण भीरूणां भयवर्धिनीtataḥ prāvartata nadī ghorarūpā mahāhavebabhūva ca viśeṣeṇa bhīrūṇāṃ bhayavardhinīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें