महाभारत 7.113.17
सानुकर्षपताकैश्च द्विपाश्वरथभूषणैःस्यन्दनैरपविद्धैश्च भग्नचक्राक्षकूबरैः
sānukarṣapatākaiśca dvipāśvarathabhūṣaṇaiḥsyandanairapaviddhaiśca bhagnacakrākṣakūbaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें