महाभारत 7.113.1
धृतराष्ट्र उवाच · dhṛtarāṣṭra uvāca
महानपनयः सूत ममैवात्र विशेषतःस इदानीमनुप्राप्तो मन्ये संजय शोचतः
mahānapanayaḥ sūta mamaivātra viśeṣataḥsa idānīmanuprāpto manye saṃjaya śocataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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