महाभारत 7.113.24
अचिन्त्यमद्भुतं चैव तयोः कर्मातिमानुषम्दृष्ट्वा चारणसिद्धानां विस्मयः समपद्यत
acintyamadbhutaṃ caiva tayoḥ karmātimānuṣamdṛṣṭvā cāraṇasiddhānāṃ vismayaḥ samapadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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