महाभारत 7.114.35सुवर्णपुङ्खैर्भीमेन सायकैर्नतपर्वभिःगगने रचिता माला काञ्चनीव व्यराजतsuvarṇapuṅkhairbhīmena sāyakairnataparvabhiḥgagane racitā mālā kāñcanīva vyarājataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें