महाभारत 7.114.39तयोर्विसृजतोस्तत्र शरजालानि मारिषवायुभूतान्यदृश्यन्त संसक्तानीतरेतरम्tayorvisṛjatostatra śarajālāni māriṣavāyubhūtānyadṛśyanta saṃsaktānītaretaramइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें