महाभारत 7.114.42
पुनश्चासृजदुग्राणि शरवर्षाणि पाण्डवःअमर्षी बलवान्क्रुद्धो दिधक्षन्निव पावकः
punaścāsṛjadugrāṇi śaravarṣāṇi pāṇḍavaḥamarṣī balavānkruddho didhakṣanniva pāvakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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