महाभारत 7.114.88
तमन्तरिक्षे नाराचं द्रौणिश्चिच्छेद पत्रिणाधनंजयभयात्कर्णमुज्जिहीर्षुर्महारथः
tamantarikṣe nārācaṃ drauṇiściccheda patriṇādhanaṃjayabhayātkarṇamujjihīrṣurmahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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