Loading
महाभारत 7.115.7
यच्च विक्षोभ्य महतीं सेनां संलोड्य चासकृत्एकः प्रविष्टः संक्रुद्धो नलिनीमिव कुञ्जरः
yacca vikṣobhya mahatīṃ senāṃ saṃloḍya cāsakṛtekaḥ praviṣṭaḥ saṃkruddho nalinīmiva kuñjaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें