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महाभारत 7.116.30
सोऽयं गुरुतरो भारः सैन्धवान्मे समाहितःज्ञातव्यश्च हि मे राजा रक्षितव्यश्च सात्यकिः
so'yaṃ gurutaro bhāraḥ saindhavānme samāhitaḥjñātavyaśca hi me rājā rakṣitavyaśca sātyakiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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