महाभारत 7.116.5संप्राप्य भारतीमध्यं तलघोषसमाकुलम्असिशक्तिगदापूर्णमप्लवं सलिलं यथाsaṃprāpya bhāratīmadhyaṃ talaghoṣasamākulamasiśaktigadāpūrṇamaplavaṃ salilaṃ yathāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें