महाभारत 7.12.13
न स्मराम्यनृतां वाचं न स्मरामि पराजयम्न स्मरामि प्रतिश्रुत्य किंचिदप्यनपाकृतम्
na smarāmyanṛtāṃ vācaṃ na smarāmi parājayamna smarāmi pratiśrutya kiṃcidapyanapākṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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