महाभारत 7.12.26
न चैनं पाण्डवेयानां कश्चिच्छक्नोति मारिषवीक्षितुं समरे क्रुद्धं महेन्द्रमिव दानवाः
na cainaṃ pāṇḍaveyānāṃ kaścicchaknoti māriṣavīkṣituṃ samare kruddhaṃ mahendramiva dānavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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