महाभारत 7.12.28
स दिशः सर्वतो रुद्ध्वा संवृत्य खमजिह्मगैःपार्षतो यत्र तत्रैव ममृदे पाण्डुवाहिनीम्
sa diśaḥ sarvato ruddhvā saṃvṛtya khamajihmagaiḥpārṣato yatra tatraiva mamṛde pāṇḍuvāhinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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