महाभारत 7.120.46
सिंहलाङ्गूलकेतुस्तु दर्शयञ्शक्तिमात्मनःशारद्वतीसुतो राजन्नर्जुनं प्रत्यवारयत्
siṃhalāṅgūlaketustu darśayañśaktimātmanaḥśāradvatīsuto rājannarjunaṃ pratyavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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