महाभारत 7.120.55
त एनमभिनर्दन्तो विधुन्वाना धनूंषि चसिषिचुर्मार्गणैर्घोरैर्गिरिं मेघा इवाम्बुभिः
ta enamabhinardanto vidhunvānā dhanūṃṣi casiṣicurmārgaṇairghorairgiriṃ meghā ivāmbubhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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