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महाभारत 7.120.9
समासाद्य तु बीभत्सुः सैन्धवं प्रमुखे स्थितम्नेत्राभ्यां क्रोधदीप्ताभ्यां संप्रैक्षन्निर्दहन्निव
samāsādya tu bībhatsuḥ saindhavaṃ pramukhe sthitamnetrābhyāṃ krodhadīptābhyāṃ saṃpraikṣannirdahanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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