महाभारत 7.121.46
ते तु सर्वप्रयत्नेन भारद्वाजं जिघांसवःसैन्धवे निहते राजन्नयुध्यन्त महारथाः
te tu sarvaprayatnena bhāradvājaṃ jighāṃsavaḥsaindhave nihate rājannayudhyanta mahārathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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