महाभारत 7.122.35
धृतराष्ट्र उवाच · dhṛtarāṣṭra uvāca
योऽसौ कर्णेन वीरेण वार्ष्णेयस्य समागमःहते तु भूरिश्रवसि सैन्धवे च निपातिते
yo'sau karṇena vīreṇa vārṣṇeyasya samāgamaḥhate tu bhūriśravasi saindhave ca nipātite
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें