महाभारत 7.122.40
न हि देवा न गन्धर्वा न यक्षोरगराक्षसाःमानवा वा विजेतारः कृष्णयोः सन्ति केचन
na hi devā na gandharvā na yakṣoragarākṣasāḥmānavā vā vijetāraḥ kṛṣṇayoḥ santi kecana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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