महाभारत 7.122.69
रक्षन्प्रतिज्ञां च पुनर्भीमसेनकृतां पुराविरथान्विह्वलांश्चक्रे न तु प्राणैर्व्ययोजयत्
rakṣanpratijñāṃ ca punarbhīmasenakṛtāṃ purāvirathānvihvalāṃścakre na tu prāṇairvyayojayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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