महाभारत 7.122.80
चित्रकाञ्चनसंनाहैर्वाजिमुख्यैर्विशां पतेघण्टाजालाकुलरवं शक्तितोमरविद्युतम्
citrakāñcanasaṃnāhairvājimukhyairviśāṃ pateghaṇṭājālākularavaṃ śaktitomaravidyutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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