महाभारत 7.122.86
भूयश्चापि निबोध त्वं तवापनयजं क्षयम्एकत्रिंशत्तव सुता भीमसेनेन पातिताः
bhūyaścāpi nibodha tvaṃ tavāpanayajaṃ kṣayamekatriṃśattava sutā bhīmasenena pātitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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