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महाभारत 7.123.2
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
विरथो भीमसेनो वै कर्णवाक्शल्यपीडितःअमर्षवशमापन्नः फल्गुनं वाक्यमब्रवीत्
viratho bhīmaseno vai karṇavākśalyapīḍitaḥamarṣavaśamāpannaḥ phalgunaṃ vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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