महाभारत 7.126.4
मन्त्रितं तव पुत्रस्य ते सर्वमवमेनिरेयेन मन्त्रेण निहताः शतशः क्षत्रियर्षभाः
mantritaṃ tava putrasya te sarvamavamenireyena mantreṇa nihatāḥ śataśaḥ kṣatriyarṣabhāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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