महाभारत 7.126.9
यं पुंसां त्रिषु लोकेषु सर्वशूरममंस्महितस्मिन्विनिहते शूरे किं शेषं पर्युपास्महे
yaṃ puṃsāṃ triṣu lokeṣu sarvaśūramamaṃsmahitasminvinihate śūre kiṃ śeṣaṃ paryupāsmahe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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