महाभारत 7.129.22
नैव स्वे न परे राजन्प्राज्ञायन्त तमोवृतेउन्मत्तमिव तत्सर्वं बभूव रजनीमुखे
naiva sve na pare rājanprājñāyanta tamovṛteunmattamiva tatsarvaṃ babhūva rajanīmukhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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