महाभारत 7.130.36
एवमुक्त्वापलायन्त सर्वे भारत पार्थिवाःविसंज्ञावाहयन्वाहान्न च द्वौ सह धावतः
evamuktvāpalāyanta sarve bhārata pārthivāḥvisaṃjñāvāhayanvāhānna ca dvau saha dhāvataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें