महाभारत 7.131.124
प्रायादतिमहाघोरं यमक्षयमहोदधिम्निहत्य राक्षसान्बाणैर्द्रौणिर्हैडिम्बमार्दयत्
prāyādatimahāghoraṃ yamakṣayamahodadhimnihatya rākṣasānbāṇairdrauṇirhaiḍimbamārdayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें