महाभारत 7.131.30तमुद्यतमहाचापं निशाम्य व्यथिता नृपाःयुगान्तकालसमये दण्डहस्तमिवान्तकम्tamudyatamahācāpaṃ niśāmya vyathitā nṛpāḥyugāntakālasamaye daṇḍahastamivāntakamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें