महाभारत 7.133.62
यांश्च तान्स्तौषि सततं दुर्योधनरिपून्द्विजतेषामपि हताः शूराः शतशोऽथ सहस्रशः
yāṃśca tānstauṣi satataṃ duryodhanaripūndvijateṣāmapi hatāḥ śūrāḥ śataśo'tha sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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