महाभारत 7.133.63
क्षीयन्ते सर्वसैन्यानि कुरूणां पाण्डवैः सहप्रभावं नात्र पश्यामि पाण्डवानां कथंचन
kṣīyante sarvasainyāni kurūṇāṃ pāṇḍavaiḥ sahaprabhāvaṃ nātra paśyāmi pāṇḍavānāṃ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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