महाभारत 7.133.7
जयं ते प्रतिजानामि वासवस्येव पावकिःप्रियं तव मया कार्यमिति जीवामि पार्थिव
jayaṃ te pratijānāmi vāsavasyeva pāvakiḥpriyaṃ tava mayā kāryamiti jīvāmi pārthiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें